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मायोपिया, जिसे निकट दृष्टि दोष के नाम से भी कहा जाता है। मायोपिया को आंखों के अपवर्तक विकार के रूप में परिभाषित किया जाता है। मायोपिया में निकट की चीजें तो साफ-साफ दिखतीं हैं किन्तु दूर की चीजें साफ नहीं दिखाई देती। अगर साइंस की भाषा में समझें तो जिन लोगों को दो मीटर या 6.6 फीट की दूरी के बाद चीजें धुंधली दिखती हैं, उन्हें मायोपिया का शिकार माना जाता है।

देश के प्रतिष्ठित संस्थान एम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो एशिया के करीब 13 प्रतिशत बच्चे मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष से ग्रसित हैं। वहीं अमेरिका के करीब 30 प्रतिशत लोग इसका दंश झेल रहे हैं। विश्व स्तर पर एक सर्वे के अनुसार वर्ष 2000 में, निकट दृष्टि दोष से सम्पूर्ण विश्व की लगभग 25 प्रतिशत आबादी इसका शिकार थी। वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि 2050 तक लगभग जनसंख्या के आधे लोग इसका शिकार होंगे।

खराब दृष्टि सिर्फ शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचाती। बल्कि, इससे आर्थिक क्षति भी होती है। डब्लूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक मयोपिया करीब 275 बिलियन के घाटे लिए जिम्मेदार है। वहीं भारत खराब दृष्टि के कारण 37 बिलियन डॉलर का सालाना घाटा झेलता है।   

मायोपिया होने के कारण

हाल के वर्षों में इसकी व्यापकता खतरनाक तौर से बढ़ रही है। मायोपिया का सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। लेकिन अध्ययनों से पता चलता है कि अत्यधिक कंप्यूटर उपयोग, आनुवांशिक पूर्वाग्रह, दृष्टि के निकट लंबे समय तक टेलीविजन देखना आंखों की थकान मायोपिया के प्रमुख कारण हैं।

एक शोध की मानें तो, करीब 60 प्रतिशत सड़क हादसे ख़राब दृष्टि की वजह से होते हैं। इससे भी ज्यादा हैरानी वाली बात तो यह है कि भारत के 42 प्रतिशत ड्राइवर स्वस्थ आंखें नहीं रखते। बावजूद इसके इनमें से अधिकतर लोग इलाज के लिए नहीं जाते।

मायोपिया का उपचार

चश्मों , कॉन्टेक्ट लेंस या रिफ्रेक्टिव सर्जरी से निकटदर्शिता को ठीक किया जा सकता है।

चश्मों – निकट दृषिट दोष में नेत्र का दूर बिन्दु अनन्त से कम दूरी पर हो जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए ऐसे अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है कि अनन्त पर रखी वस्तु से चलने वाली किरणें इस लेंस से निकलने पर नेत्र के दूर बिंदु से चली हुई प्रतीत हो। तब ये किरणें नेत्र लेंस से अपवर्तित होकर रेटिना पर मिलती हैं।

लेंस – मायोपिया के लिए चश्मे के लेंस के लिए अच्छे विकल्पों में हाई इंडेक्स लेंस (पतले, हल्के चश्मे) और एंटी-रिफ्लेक्टिव वाले लेंस शामिल हैं। इसके अलावा, अपनी आंखों को UV और उच्च-ऊर्जा वाली नीली रोशनी से बचाने के लिए फोटोक्रोमिक लेंसों पर विचार करें और एक अलग जोड़ी प्रिस्क्रिपशन द्वारा बनाये गए सनग्लासेस की आवश्यकता को कम करें ।

रिफ्रेक्टिव सर्जरी – मायोपिया को रिफ्रेक्टिव इरर भी कहते हैं, इसलिए इसे दूर करने के लिए की जाने वाली सर्जरी को रिफ्रेक्टिव सर्जरी कहते हैं। रिफ्रेक्टिव सर्जरी, चश्मों और कांटेक्ट लेंसों पर निर्भरता कम कर देती है। इसमें आई सर्जन कार्निया को पुनः आकार देने के लिए लेज़र बीम का इस्तेमाल करता है। इससे निकट दृष्टि दोष में काफी सुधार आ जाता है। कईं लोगों को सर्जरी के बाद चश्मे या कांटेक्ट लेंसों की जरूरत नहीं पड़ती है, जबकि कईं लोगों को इनकी जरूरत पड़ सकती है। रिफ्रेक्टिव सर्जरी की सलाह तब तक नहीं दी जाती जब तक कि आपके लेंस का नंबर स्थिर नहीं हो जाता।

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